rcep समझौता क्या है और भारत rcep में क्यों शामिल नहीं हुआ।

rcep समझौता क्या है और भारत RCEP में क्यों शामिल नहीं हुआ। 

इस आर्टिकल में आपको rcep समझौता क्या है के विषय में संपूर्ण रूप से जानकारी दी जाएगी और यह भी बताया जाएगा कि भारत rcep में क्यों शामिल नहीं हुआ इसके पीछे क्या कारण था और इस संगठन में शामिल ना होने से भारत को हानि होगी या लाभ और rcep संगठन में कौन-कौन देश हैं और इस संगठन का प्रमुख देश कौन है इन सभी जानकारी के विषय में पूर्ण रूप से जानने के लिए इस आर्टिकल को पूरा जरूर पढ़ें ताकि आपको इस संगठन के बारे में संपूर्ण जानकारी हो सके। 

Rcep समझौता क्या है और भारत RCEP में क्यों शामिल नहीं हुआ।

rcep समझौता क्या है 

rcep full form Regional Comprehensive Economic Partenership है यह चीन सहित एशिया-प्रशांत के कुल 16 देशों का एक संगठन बनाया गया जो कि व्यापार से संबंधित संगठन है जिसका यह उद्देश्य है कि इस संगठन में आने वाले सभी देश दूसरे देशों में बहुत कम टैक्स पर व्यापार कर सकेंगे जिससे कि इस समूह में आने वाले सभी देश कर मुक्त व्यापार दूसरे देशों में कर सकेंगे इनमें प्रमुख देश चीन है और या संगठन चीन की अगुवाई में बनाया गया। 

 यह संगठन चीन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है और जैसा कि सबको पता ही होगा चीन दुनिया का मैन्युफैक्चरिंग हब है जिससे कि चीन को दुनिया के दूसरे देशों में अपने प्रोडक्ट को बेचने होते हैं अब चीन ने यह संगठन इसीलिए बनाया ताकि इन सभी देशों में चीन की कंपनियों को सबसे कम मात्रा में कर देना पड़े यही अगर भारत की बात किया जाए तो भारत दुनिया का सबसे बड़ा बाजार है। 

 जिससे कि इन सभी देशों की यह जरूरत थी कि भारत भी इस Rcep संगठन में शामिल हो ताकि भारत के सबसे बड़े बाजार में इस संगठन में शामिल सभी देश अपने सामानों को बहुत कम कर पर बेच सकें इसमें बाजार की दृष्टि से देखें तो भारत की सबसे अहम भूमिका थी अगर वही विक्रेता की दृष्टि से देखा जाए तो चीन इसमें प्रमुख देश है। 

आर सी. ई पी एक फ्री ट्रेड संगठन है जो कि दुनिया का सबसे बड़ा फ्री ट्रेड संगठन है जिसका प्रमुख उद्देश्य इस संगठन में शामिल सभी देशों द्वारा एक दूसरे देश में अपने व्यापार को या तो बहुत कम कर में या फिर कर मुक्त व्यापार करने का मौका दिया जाना जिसमें भारत में शामिल होने से मना कर दिया जिसका कारण था भारत को सबसे अधिक व्यापार घाटा होना जिसमें आने वाले समय में अगर भारत इसमें शामिल हो जाता तो भारत को बहुत अधिक घाटा लग सकता था। 

व्यापार घाटा क्या है

व्यापार घाटा उसे कहते हैं जब कोई भी देश दूसरे देश में आयात और निर्यात करता है तब अगर वह देश निर्यात की तुलना में आयात अधिक करता है तो उस देश को व्यापार घाटा लगता है जैसे अगर बात करें भारत और चीन के संबंध में तो भारत चीन में बहुत कम ही सामान बेचता है लेकिन चीन भारत में अपना बहुत अधिक सामान बेचता है जिससे भारत को व्यापार घाटा होता है वही अगर चीन की बात करें तो इस संबंध में चीन को व्यापार फायदा  होता है। 

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rcep समझौता में क्यों शामिल नहीं हुआ भारत 

अब बात करते हैं आखिर इस rcep समझौता में भारत क्यों शामिल नहीं हुआ तो इसका सबसे प्रमुख कारण था भारत में व्यापार घाटा अगर भारत इस समझौता में शामिल हो जाता तो भारत बहुत कम ही सामान दूसरे देशों में बेचता है लेकिन दूसरे देश जैसे इस संगठन का प्रमुख देश चीन भारत में अपने सामान को बहुत अधिक मात्रा में बेचता है तो भारत सरकार को दूसरे देशों द्वारा भारत में बेचे जा रहे सामान पर या तो एकदम ही कर नहीं मिलता या बहुत कम मात्रा में कर मिलता जिससे कि दूसरे देशों के सामान भारत में और सस्ते हो जाते और भारत के व्यापारियों को बहुत अधिक घाटा होने लगता है जिससे कि भारत का व्यापार एकदम ही खत्म हो जाता और दूसरे देश की कंपनियों को बहुत अधिक फायदा होता। 

rcep संगठन में शामिल देश 

आर सी. ई पी संगठन का प्रमुख देश चीन है जो कि पूरी दुनिया में अपने व्यापार को बढ़ा रहा है और RCEP संगठन में शामिल सभी देशों में चीन को ही सबसे अधिक मुनाफा होने वाला है और अगर इस संगठन में भारत शामिल हो जाता तो सबसे अधिक व्यापार घाटा भारत को ही होता क्योंकि भारत सबसे बड़ा बाजार रखने वाला देश है वहीं अगर चीन की बात करें तो चीन मैन्युफैक्चरिंग हब है जिससे कि चीन में बहुत अधिक सामानों को मैन्युफैक्चर किया जाता है जिन्हें सभी देशों में बेचा जाता है यही कारण है कि भारत इस संगठन में नहीं शामिल हुआ अब आगे है rcep संगठन में शामिल देश की सूची जो इस समय शामिल हैं

10 आसियान देश जो इस समझौता में शामिल हैं 

  • इंडोनेशिया 
  • फिलीपींस 
  • वियतनाम 
  • ब्रुनेई 
  • थाईलैंड 
  • सिंगापुर 
  • कंबोडिया 
  • म्यांमार 
  • मलयेशिया 
  • लाओस

आसियान देशों के आलावा आर सी. ई पी में शामिल सभी देश 

  • चीन 
  • दक्षिण कोरिया
  • ऑस्ट्रेलिया 
  • न्यूजीलैंड
  • जापान 

आर सी. ई पी संगठन में कौन प्रमुख देश शामिल नहीं हुए-

इस संगठन में भारत के अलावा अमेरिका भी शामिल नहीं है और अमेरिका का भी बाजार बहुत बड़ा है जिसकी वजह से अमेरिका भी इस समझौता में शामिल नहीं हुआ क्योंकि भारत और अमेरिका दोनों देशों के व्यापारी अपनी देश में अधिक गुडवत्ता के सामान बनाने पर जोर देते हैं जिसकी वजह से  इनका दाम भी अधिक हो जाता है। 

 वहीं अगर बात करें चीन की कंपनियों की तो उन्हें गुडवत्ता से कोई मतलब नहीं है जिसके कारण उनका सामान कम लागत में तैयार हो जाता और अगर टैक्स नहीं लगेगा तो चीन की सभी कंपनियां दूसरे देशों में अपने सामान को और कम दाम में बेचने में समर्थ हो जाएंगी जिससे कि भारत और अमेरिका की कंपनियां डूब जाएंगी और चीन का इन देशों के बाजारों पर संप्रभुता अधिक शक्तिशाली हो जाएगा यही कारण है कि अमेरिका और भारत इस संगठन में नहीं शामिल हुए। 

rcep समझौता पर उद्योग जगत पर क्या असर पड़ेगा

इस समझौता को लेकर व्यापार जगत ने चिंता जताई है क्योंकि यह माना जा रहा है कि अगर भारत इस समझौता में शामिल हो जाता है तो विदेशी कंपनियां भारत में अपने सामान को अधिक मात्रा में व कम शुल्क में बेचने लगेंगे जिससे भारत में सभी कंपनियों समेत भारत के ग्रामीण और व्यापार उद्योग जैसे प्रमुख क्षेत्रों को घाटा लगने लगेगा इसके लिए उद्योग जगत का पक्ष है कि भारत इस संगठन में शामिल ना हो। 

Conclusion- 

हम आशा करते हैं कि Rcep समझौता क्या है इसके विषय में आपको पूरी जानकारी मिल गई होगी और आपको यह भी पता चल गया होगा की भारत rcep में क्यों शामिल नहीं हुआ और इस विषय में आपकी क्या राय है क्या भारत को इस संगठन में शामिल होना चाहिए या नहीं हम इस आर्टिकल में संपूर्ण जानकारी देने का प्रयास किए हैं लेकिन अगर कहीं भी जानकारी अधूरी रह गई हो तो कमेंट बॉक्स में  जानकारी को पूरा जरूर करें ताकि Read Hindi News के पाठकों तक संपूर्ण जानकारी पहुंच सके धन्यवाद। 

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